भारत रत्न पं. गोबिन्द बल्लभ पन्त की कर्मभूमि एवं उनके सुपुत्र स्व. कृष्ण चन्द्र पन्त की जन्मस्थली का गौरव हासिल करने से परोक्ष रूप से भवाली ...
और पढ़ेंवो भी क्या दिन थे? कोई 12-13 बरस की उमर रही होगी. रामलीला हमारे गांव से 5 मील दूर भवाली में हुआ करती. भवाली की रामलीला की क्षेत्र में अपनी अ...
और पढ़ेंहम उन्हें ताऊजी कहते थे परंतु हमारी इजा की दीदी के श्रीमान होने के नाते दिल्ली की देसी भाषा में वे हमारे मौसा जी होते. ताऊजी का व्यक्तित्व क...
और पढ़ेंशहरों में आकर अपना भाग्य आजमाने वाले हममें से ज्यादातर लोगों की कहानी एक जैसी है. गरीबी से अमीरी की कहानी या यूं कहें कि हमारी नजर में जो गर...
और पढ़ेंचौमास (बरसात) में बारिश से जरा सी राहत मिली कि सारे गांव के लोग कोदा-झंगोरा गोड़ने खेतों की ओर चल पड़ते. मर्द बैल जोत कर कोदे में ददंला लगात...
और पढ़ेंकरीब एक फीट चौड़ी तो डेढ़ फीट लम्बी और आधा इंच मोटाई की तख्ती. इसकी लकड़ी होती रीठा, पांगर, तुन, अखरोट, खड़िक, बितोड़, चीड़ या द्यार-देवदार ...
और पढ़ें“ईजा यौ साल कभैं नी आण चैं,” आमा के मुह से एक दर्द भरे लहजे में यह बात निकली. मैं जब आज बैंक गया था तब आमा मुझे वही मिली. आमा ने जिस स्नेह स...
और पढ़ें2006 का साल था. हमने उत्तराखंड के सबसे बेहतरीन उच्च शिक्षा परिसरों में गिने जाने वाले कुमाऊँ यूनिवर्सिटी के सोबन सिंह जीना परिसर, अल्मोड़ा म...
और पढ़ेंकोरोना के शुरूआत में जब लॉकडाउन 31 मार्च तक किया गया तो उन दिनों हर परिवार में हर किसी ने अपनी तीखी जीभ को दांतों के भीतर लॉकडाउन कर चमकीले ...
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